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छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति / CG Art & Culture GK

CG GK - छत्तीसगढ़ कला एवं संस्कृति सामान्य ज्ञान|Chhattisgarh Art & Culture GK

AllCGGK CG GK Chhattisgarh Art GK Culure GK 

Chhattisgarh ki Kala or Sanskriti
छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति 



छत्तीसगढ़ की संस्कृति उसकी लोकपरंपराओं, जनजातीय जीवन, लोकनृत्य, लोकगीत, लोकनाट्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, चित्रकला, हस्तशिल्प, पर्व-त्योहार और धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं का जीवंत मिश्रण है। यहाँ की सांस्कृतिक पहचान में पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा, ददरिया, पंडवानी और नाचा जैसी लोकपरंपराओं का विशेष स्थान है।
यह पोस्ट CGPSC, CG Vyapam, पुलिस, शिक्षक, पटवारी, वनरक्षक तथा अन्य छत्तीसगढ़ प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें केवल रटने योग्य तथ्य ही नहीं, बल्कि उनके पीछे का सांस्कृतिक संदर्भ भी सरल भाषा में दिया गया है।

1.छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति – परिचय

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विकास यहाँ के ग्रामीण और जनजातीय समाज की जीवनशैली के साथ हुआ है। खेती, जंगल, ऋतु परिवर्तन, धार्मिक आस्था, सामाजिक उत्सव और सामुदायिक जीवन ने यहाँ की कला एवं संस्कृति को अलग पहचान दी है।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति को समझने के लिए इसे कुछ प्रमुख भागों में देख सकते हैं—
लोकनृत्य → पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा आदि
लोकगीत → ददरिया, करमा गीत, सुआ गीत आदि
लोकनाट्य → नाचा
लोकगाथा/प्रस्तुति → पंडवानी
जनजातीय संस्कृति → गोंड, मुरिया, बैगा, हल्बा, कमार आदि समुदायों की परंपराएँ
हस्तशिल्प → बेल मेटल, बाँस शिल्प, काष्ठ शिल्प, कोसा आदि
छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी सामुदायिक सहभागिता है। अनेक लोकपरंपराएँ केवल मंचीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का हिस्सा रही हैं।



2.CG Art & Culture के महत्वपूर्ण तथ्य / छत्तीसगढ़ कला एवं संस्कृति सामान्य ज्ञान

CG Art & Culture के महत्वपूर्ण तथ्य
  • पंथी नृत्य सतनामी समुदाय की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में जाना जाता है।
  • पंथी नृत्य का संबंध गुरु घासीदास की शिक्षाओं और सतनामी परंपरा से जोड़ा जाता है।
  • राउत नाचा यादव/राउत समुदाय की प्रमुख लोकनृत्य परंपरा है।
  • राउत नाचा का संबंध दीपावली के बाद के उत्सवों से विशेष रूप से जुड़ा है।
  • सुआ नृत्य में महिलाएँ सामूहिक रूप से नृत्य-गायन करती हैं।
  • सुआ परंपरा में सुआ (तोते) का प्रतीकात्मक प्रयोग विशेष पहचान रखता है।
  • करमा नृत्य मध्य भारत की जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण है।
  • ददरिया छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगीतों में गिना जाता है।
  • ददरिया को कई बार छत्तीसगढ़ी लोकजीवन का लोकप्रिय प्रेमगीत भी कहा जाता है।
  • पंडवानी महाभारत की कथाओं पर आधारित प्रसिद्ध गायन-प्रस्तुति परंपरा है।
  • पंडवानी में महाभारत के विशेष रूप से पांडवों से संबंधित प्रसंगों का गायन किया जाता है।
  • तीजन बाई पंडवानी की प्रसिद्ध कलाकारों में शामिल हैं।
  • नाचा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोकनाट्य परंपरा है।
  • नाचा में अभिनय, संवाद, गीत और हास्य का समन्वय मिलता है।
  • बेल मेटल/ढोकरा शिल्प छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पारंपरिक धातु कला है।
  • बस्तर अपनी जनजातीय कला और हस्तशिल्प के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
  • बाँस से बनी वस्तुएँ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक शिल्प परंपरा का हिस्सा हैं।
  • कोसा वस्त्र छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पारंपरिक वस्त्र पहचान में शामिल है।
  • जनजातीय संस्कृति में प्रकृति और सामुदायिक जीवन का विशेष महत्व दिखाई देता है।
  • बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ के सबसे विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है।

Exam में याद रखने वाली जोड़ियाँ

पंथी → सतनामी परंपरा
राउत नाचा → यादव/राउत समुदाय
सुआ → महिला सामूहिक नृत्य
पंडवानी → महाभारत
नाचा → लोकनाट्य
ददरिया → लोकगीत
बस्तर → जनजातीय कला


3. छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

पंथी नृत्य
पंथी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण लोकनृत्य परंपराओं में से एक है। इसका संबंध सतनामी समाज और गुरु घासीदास की विचारधारा से माना जाता है।
पंथी की प्रस्तुति में नृत्य, गीत और आध्यात्मिक-सामाजिक संदेशों का समावेश दिखाई देता है।
Exam Point:
पंथी को केवल एक नृत्य के रूप में न पढ़ें; इसे सतनामी परंपरा + गुरु घासीदास + सामाजिक संदेश से जोड़कर याद करें।
 राउत नाचा
राउत नाचा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोकनृत्य परंपरा है। इसका संबंध मुख्य रूप से राउत/यादव समुदाय से है।
यह विशेष रूप से दीपावली के आसपास होने वाले उत्सवी वातावरण से जुड़ा हुआ है। नर्तक पारंपरिक वेशभूषा में सामूहिक रूप से प्रस्तुति देते हैं।
याद रखने की ट्रिक:
राउत → यादव → राउत नाचा
 सुआ नृत्य
सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की महिला लोकनृत्य परंपरा की विशिष्ट पहचान है। इसमें महिलाएँ समूह बनाकर गीत गाते हुए नृत्य करती हैं।
सुआ अर्थात तोते का प्रतीक इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह नृत्य ग्रामीण सामाजिक जीवन और महिलाओं की सामूहिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को दर्शाता है।
 करमा नृत्य
करमा नृत्य छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के कई क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृति में पाया जाता है।
इसकी प्रस्तुति करमा पर्व और करम वृक्ष/करम देवता से जुड़ी लोकमान्यताओं से संबंधित मानी जाती है।
यह सामुदायिक सहभागिता और प्रकृति से जुड़े विश्वासों को अभिव्यक्त करता है।


4.लोकनाट्य, लोकगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

नाचा
नाचा छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकनाट्य है।
इसमें हास्य, व्यंग्य, संवाद, गीत और अभिनय का मिश्रण मिलता है। ग्रामीण समाज में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक विषयों को प्रस्तुत करने का माध्यम भी रहा है।
Exam Connection
नाचा → लोकनाट्य
यह जोड़ी सीधे प्रश्न के रूप में पूछी जा सकती है।
पंडवानी
पंडवानी छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध कथात्मक गायन परंपराओं में से एक है।
इसमें महाभारत की कथा, विशेष रूप से पांडवों से जुड़े प्रसंगों को गायन एवं अभिनयात्मक प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
प्रमुख कलाकार
तीजन बाई पंडवानी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कलाकार हैं।
पंडवानी को याद रखने का आसान तरीका:
पंडवानी → पांडव → महाभारत
ददरिया
ददरिया छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय लोकगीतों में शामिल है। इसमें लोकजीवन, भावनाओं और विशेष रूप से प्रेम-संबंधी अभिव्यक्तियों का स्वरूप दिखाई देता है।
छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के अध्ययन में ददरिया को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
लोकगीत और लोकजीवन
छत्तीसगढ़ में लोकगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहे हैं। कृषि कार्य, विवाह, पर्व, ऋतु, सामाजिक संबंध और दैनिक जीवन से जुड़े अवसरों पर अलग-अलग प्रकार के गीत गाए जाते हैं।
यही कारण है कि लोकगीतों को समझने के लिए छत्तीसगढ़ी सामाजिक जीवन को समझना भी आवश्यक है।



5. जनजातीय संस्कृति, पर्व एवं पारंपरिक कला

जनजातीय संस्कृति
छत्तीसगढ़ में अनेक जनजातीय समुदाय निवास करते हैं। उनकी जीवनशैली में जंगल, भूमि, कृषि, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
प्रमुख जनजातीय समुदायों में—
गोंड
मुरिया
मारिया
बैगा
हल्बा
कमार
भतरा
उरांव
कंवर
आदि शामिल हैं।
इन समुदायों की अपनी सामाजिक परंपराएँ, लोकगीत, नृत्य, वेशभूषा और धार्मिक मान्यताएँ हैं।
 बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की अत्यंत विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा है।
नाम में “दशहरा” होने के बावजूद इसकी परंपराएँ सामान्य रामलीला-केंद्रित दशहरा उत्सव से अलग हैं। इसका संबंध बस्तर की स्थानीय धार्मिक और जनजातीय परंपराओं तथा देवी दंतेश्वरी की आराधना से विशेष रूप से जुड़ा है।
Exam Point
बस्तर दशहरा → देवी दंतेश्वरी → बस्तर की विशिष्ट परंपरा
मड़ई
मड़ई छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में आयोजित होने वाला पारंपरिक धार्मिक-सामाजिक मेला/उत्सव है।
इसमें स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना, सामुदायिक मिलन और लोकसंस्कृति की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
हरेली
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख कृषि एवं लोकपर्व है।
यह खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन से जुड़ा पर्व है। कृषि उपकरणों की पूजा तथा ग्रामीण परंपराएँ इसके महत्वपूर्ण पक्ष हैं।
हरेली → कृषि संस्कृति
याद रखने की आसान ट्रिक।
 पारंपरिक हस्तशिल्प
छत्तीसगढ़ विशेष रूप से बस्तर की धातु कला, बाँस शिल्प, काष्ठ कला और पारंपरिक वस्त्रों के लिए जाना जाता है।
ढोकरा/बेल मेटल
धातु से आकृतियाँ एवं उपयोगी वस्तुएँ बनाने की पारंपरिक तकनीक को बस्तर की प्रसिद्ध शिल्प पहचान से जोड़ा जाता है।
बाँस शिल्प
बाँस से टोकरी, घरेलू उपयोग की वस्तुएँ तथा सजावटी सामग्री बनाई जाती है।
काष्ठ शिल्प
लकड़ी पर पारंपरिक आकृतियों एवं धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों की नक्काशी की जाती है।



6.CG GK Art & Culture One Liner GK

  • इस भाग में जानबूझकर पहले के Important Facts और MCQ की हूबहू पुनरावृत्ति नहीं की गई है।
  • छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में कृषि और प्रकृति दोनों की गहरी छाप दिखाई देती है।
  • लोककला किसी क्षेत्र के सामाजिक जीवन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है।
  • पंथी की प्रस्तुति में नृत्य के साथ वैचारिक एवं आध्यात्मिक अभिव्यक्ति भी मिलती है।
  • सुआ परंपरा में सामूहिक महिला सहभागिता इसकी प्रमुख विशेषताओं में है।
  • राउत नाचा में सामुदायिक उत्सव और पारंपरिक वेशभूषा का विशेष महत्व है।
  • करमा परंपरा में प्रकृति और धार्मिक विश्वासों का सांस्कृतिक संबंध दिखाई देता है।
  • लोकनृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामुदायिक पहचान का माध्यम भी हैं।
  • पंडवानी मौखिक परंपरा से विकसित कथात्मक प्रस्तुति का उदाहरण है।
  • पंडवानी में कथा, संगीत, अभिनय और संवादात्मक शैली का मेल दिखाई देता है।
  • नाचा में मनोरंजन के साथ सामाजिक व्यंग्य की परंपरा भी देखने को मिलती है।
  • ददरिया छत्तीसगढ़ी लोकभावनाओं की सहज अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है।
  • लोकगीतों का संबंध जीवन के विभिन्न संस्कारों और अवसरों से हो सकता है।
  • बस्तर की कला में स्थानीय जनजातीय जीवन की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।
  • ढोकरा कला में धातु से कलात्मक आकृतियाँ तैयार करने की परंपरा दिखाई देती है।
  • बाँस शिल्प ग्रामीण जीवन में उपयोगिता और कलात्मकता दोनों को जोड़ता है।
  • काष्ठ शिल्प में स्थानीय कलाकारों की पारंपरिक नक्काशी कौशल दिखाई देता है।
  • हरेली में कृषि जीवन और ग्रामीण विश्वासों का सांस्कृतिक मेल दिखाई देता है।
  • बस्तर दशहरा की धार्मिक-सांस्कृतिक संरचना सामान्य दशहरा उत्सव से अलग पहचान रखती है।
  • मड़ई जैसे आयोजन सामाजिक मेल-जोल के साथ स्थानीय धार्मिक परंपराओं को भी जीवित रखते हैं।
  • जनजातीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान अनेक परंपराओं में दिखाई देता है।
  • पारंपरिक संस्कृति पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक और व्यवहारिक माध्यमों से आगे बढ़ती है।
  • लोकनाट्य में स्थानीय भाषा और हास्य का प्रयोग दर्शकों से सीधा संबंध स्थापित करता है।
  • लोकवाद्य लोकनृत्य और लोकगीत की प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में सहायता करते हैं।
  • किसी लोकपरंपरा का अध्ययन उसके समुदाय और सामाजिक संदर्भ से अलग करके करना अधूरा हो सकता है।
  • छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता ग्रामीण और जनजातीय परंपराओं के सह-अस्तित्व से समृद्ध हुई है।
  • लोकपर्व स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बाजार और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • हस्तशिल्प स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आर्थिक गतिविधि में बदलने का माध्यम है।
  • छत्तीसगढ़ की संस्कृति में धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का परस्पर संबंध दिखाई देता है।
  • लोकगीत और लोकनृत्य किसी समाज की सामूहिक स्मृति को संरक्षित रखने में मदद करते हैं।
  • CG Art & Culture को समझने का सबसे अच्छा तरीका है—समुदाय + परंपरा + पर्व + कला + लोकजीवन को एक साथ पढ़ना।


7.CG GK MCQ Art & Culture

Q1. पंथी नृत्य का संबंध मुख्य रूप से किस समुदाय की परंपरा से है?

  1. सतनामी
  2. राउत
  3. हल्बा
  4. उरांव
Answer:  सतनामी

Q2. पंडवानी का प्रमुख आधार क्या है?

    1. रामायण
    2. महाभारत
    3. जातक कथाएँ
    4.  पंचतंत्र
    Answer: महाभारत

    Q3. पंडवानी की प्रसिद्ध कलाकार के रूप में किसका नाम जाना जाता है?

    1. तीजन बाई
    2. हबीब तनवीर
    3. मिनीमाता
    4. फणीश्वरनाथ
    Answer: तीजन बाई

    Q4. सुआ नृत्य की प्रमुख विशेषता क्या है?

    1. केवल पुरुषों द्वारा प्रस्तुति
    2. महिलाओं का सामूहिक नृत्य-गायन
    3. केवल धार्मिक नाटक
    4. तलवार नृत्य
    Answer: महिलाओं का सामूहिक नृत्य-गायन

    Q5.  बस्तर दशहरा की प्रमुख धार्मिक परंपरा किस देवी से जुड़ी है?

    1. महामाया
    2. दंतेश्वरी
    3. शीतला
    4. लक्ष्मी
    Answer: दंतेश्वरी


    8.Exam Notes & Tips & Question Answer

    • CG Art & Culture को समझने का सबसे अच्छा तरीका है—समुदाय + परंपरा + पर्व + कला + लोकजीवन को एक साथ पढ़ना।

    •  परीक्षा में विशेष ध्यान दें

    CG Art & Culture से प्रश्न बनाते समय अक्सर कला → कलाकार, नृत्य → समुदाय, पर्व → परंपरा, लोकगीत → क्षेत्र/विषय, तथा शिल्प → सामग्री के आधार पर प्रश्न बनाए जा सकते हैं।
    इसलिए केवल नाम याद न करें। इस प्रकार पढ़ें:
    पंथी → सतनामी
    पंडवानी → महाभारत
    तीजन बाई → पंडवानी
    नाचा → लोकनाट्य
    ददरिया → लोकगीत
    राउत नाचा → राउत/यादव
    हरेली → कृषि
    बस्तर दशहरा → दंतेश्वरी
    ढोकरा → धातु शिल्प

    •  अंतिम Revision

    छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को एक लाइन में याद करें:
    “लोकनृत्य + लोकगीत + लोकनाट्य + जनजातीय परंपरा + पर्व + हस्तशिल्प = CG Art & Culture”
    और परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण समूह:
    पंथी | राउत नाचा | सुआ | करमा | पंडवानी | नाचा | ददरिया | बस्तर दशहरा | हरेली | ढोकरा

    • महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर एवं MCQ

     महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर
    प्रश्न 1. पंथी नृत्य का संबंध किस समुदाय से है?
    उत्तर: पंथी नृत्य का संबंध सतनामी समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा से है।
    प्रश्न 2. पंडवानी किस महाकाव्य की कथाओं पर आधारित है?
    उत्तर: पंडवानी मुख्यतः महाभारत की कथाओं पर आधारित गायन-प्रस्तुति है।
    प्रश्न 3. पंडवानी की प्रसिद्ध कलाकार कौन हैं?
    उत्तर: तीजन बाई पंडवानी की प्रसिद्ध कलाकार हैं।
    प्रश्न 4. राउत नाचा किस समुदाय की प्रमुख लोकपरंपरा है?
    उत्तर: राउत नाचा मुख्यतः राउत/यादव समुदाय की लोकनृत्य परंपरा है।
    प्रश्न 5. सुआ नृत्य की प्रमुख विशेषता क्या है?
    उत्तर: इसमें महिलाएँ सामूहिक रूप से गीत गाते हुए नृत्य करती हैं और सुआ अर्थात तोते का प्रतीकात्मक प्रयोग होता है।
    प्रश्न 6. छत्तीसगढ़ का कौन-सा लोकनाट्य हास्य एवं व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध है?
    उत्तर: नाचा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोकनाट्य परंपरा है, जिसमें हास्य और व्यंग्य का महत्वपूर्ण स्थान है।
    प्रश्न 7. बस्तर दशहरा किस देवी की आराधना से विशेष रूप से जुड़ा है?
    उत्तर: बस्तर दशहरा देवी दंतेश्वरी की आराधना और स्थानीय परंपराओं से विशेष रूप से जुड़ा है।
    प्रश्न 8. हरेली पर्व मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
    उत्तर: हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख कृषि एवं ग्रामीण जीवन से जुड़ा लोकपर्व है।
    प्रश्न 9. ढोकरा कला किस प्रकार की कला है?
    उत्तर: ढोकरा पारंपरिक धातु शिल्प कला की प्रसिद्ध शैली है।
    प्रश्न 10. ददरिया छत्तीसगढ़ की किस सांस्कृतिक विधा से संबंधित है?
    उत्तर: ददरिया छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगीतों में शामिल है।

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